महानदी जल विवाद 2025
महानदी, छत्तीसगढ़ की प्रमुख नदियों में से एक है, जिसका उद्गम धमतरी जिले की सिहावा पर्वतमाला से होता है। यह नदी ओडिशा होते हुए बंगाल की खाड़ी में मिलती है। छत्तीसगढ़ में कई सिंचाई और जलविद्युत परियोजनाएं इस नदी पर आधारित हैं।
वर्षों से ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच इस नदी के जल बंटवारे को लेकर मतभेद रहे हैं। ओडिशा का आरोप है कि छत्तीसगढ़ ने बिना पूर्व सूचना के महा नदी पर जल संरचनाएं (जैसे – बैराज और एनीकट्स) बनाई हैं, जिससे नीचे की ओर जल प्रवाह में कमी आई है। इस कारण ओडिशा के किसानों को सिंचाई में कठिनाई और जल संकट का सामना करना पड़ता है।
वर्तमान घटनाक्रम (अगस्त 2025):
हाल ही में ओडिशा और छत्तीसगढ़ दोनों राज्यों ने महा नदी जल विवाद को सौहार्द्रपूर्वक सुलझाने की इच्छा जताई है। यह एक महत्वपूर्ण मोड़ है क्योंकि इससे पहले यह मामला महा नदी जल विवाद अधिकरण (MWDT) के समक्ष लम्बे समय से विचाराधीन था।
• ट्रिब्यूनल अध्यक्ष: पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश बेला एम. त्रिवेदी
• अगली सुनवाई की तिथि: 6 सितंबर 2025 तय की गई है
अधिकरण ने दोनों राज्यों के मुख्य सचिवों को निर्देशित किया है कि वे समाधान वार्ता की प्रगति की रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
मुख्यमंत्री स्तर पर पहल:
• ओडिशा के मुख्यमंत्री श्री मोहन मांझी ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साई को पत्र लिखकर संघ सरकार के जल शक्ति मंत्रालय के मार्गदर्शन में एक संयुक्त समिति गठित करने का प्रस्ताव दिया है।
• इस समिति का नेतृत्व केंद्रीय जल आयोग (CWC) द्वारा करने की बात की गई है, ताकि तकनीकी व निष्पक्ष समाधान संभव हो सके।
छत्तीसगढ़ सरकार ने इस प्रस्ताव पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए कहा है कि वे समाधान की दिशा में विचार कर रहे हैं।
CGPSC परीक्षा हेतु प्रासंगिक बिंदु:
1. नदी विवादों की संवैधानिक स्थिति: संविधान की अनुच्छेद 262 के तहत केंद्र सरकार को अंतर-राज्यीय जल विवादों के समाधान का अधिकार है।
2. विधिक ढांचा: Inter-State River Water Disputes Act, 1956 के तहत केंद्र सरकार ने महा नदी विवाद पर अधिकरण गठित किया है।
3. राज्य-स्तरीय कूटनीति: मुख्यमंत्री स्तर की पत्राचार व प्रस्ताव इस बात का संकेत हैं कि राज्य अब न्यायिक से अधिक संवाद आधारित समाधान को प्राथमिकता दे रहे हैं।
4. संघीय सहयोग: जल शक्ति मंत्रालय और CWC की संभावित भूमिका ‘सहकारी संघवाद’ (cooperative federalism) का उदाहरण है।
महानदी जल विवाद केवल एक जलसंसाधन का मुद्दा नहीं, बल्कि यह भारत के संघीय ढांचे की कार्यप्रणाली, अंतर-राज्यीय संबंधों और प्राकृतिक संसाधनों के न्यायपूर्ण वितरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। CGPSC परीक्षा की दृष्टि से यह विषय राज्य नीति, प्रशासन, पर्यावरण प्रबंधन और संविधान जैसे अनेक खंडों से जुड़ा हुआ है।
FAQs
Q. महानदी जल विवाद कब हुआ था?
A. महानदी जल विवाद वर्ष 2016 में तब उभरा जब ओडिशा ने छत्तीसगढ़ पर बिना सूचना के बांध बनाने और जल प्रवाह रोकने का आरोप लगाया।
इसके बाद केंद्र सरकार ने 2018 में इस विवाद के समाधान हेतु एक जल अधिकरण (Tribunal) का गठन किया।
Q. महानदी नदी जल विवाद में कौन सा राज्य शामिल है?
महानदी जल विवाद में ओडिशा और छत्तीसगढ़ राज्य शामिल हैं, जहां जल बंटवारे को लेकर वर्षों से मतभेद चले आ रहे हैं।
Q. महानदी का पुराना नाम क्या था?
A. चित्रोत्पला
Q. महानदी पर बने बांध का क्या नाम है?
A. हीराकुद बाँध