छत्तीसगढ़ करेंट अफेयर्स: 23 अगस्त 2025 | CGPSC Exam, CG Vyapam, Sarkari Exam

Chhattisgarh Current Affairs : 23 August 2025

छत्तीसगढ़ करंट अफेयर्स 23 अगस्त 2025: छत्तीसगढ़ में 23 अगस्त 2025 को कई महत्वपूर्ण घटनाएं सामने आईं, जो CGPSC, vyapam और अन्य राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इस लेख में हम छत्तीसगढ़ की ताजा खबरें, विकास परियोजनाएं, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़े सुधार, और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में किए जा रहे प्रयासों को विस्तार से प्रस्तुत कर रहे हैं। यह जानकारी आपको परीक्षा की दृष्टि से अद्यतन रखने के साथ-साथ राज्य के समसामयिक परिदृश्य की गहन समझ भी प्रदान करेगी। स्रोत: नवभारत न्यूज़पेपर, दैनिक भास्कर, DPR Chhattisgarh अन्य ऑथेंटिक न्यूज़ ।

राज्य के ऊर्जा शिक्षा उद्यान होंगे नेट जीरो
छत्तीसगढ़ राज्य के सभी ऊर्जा शिक्षा उद्यान अब नेट जीरो बनने जा रहे हैं। क्रेडा (छत्तीसगढ़ अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण) द्वारा यह पहल की गई है जिसके अंतर्गत राजनांदगांव और बिलासपुर ऊर्जा शिक्षा उद्यानों में 50-50 किलोवाट क्षमता के ऑनग्रिड सोलर पावर प्लांट स्थापित किए गए हैं। इन उद्यानों की स्थापना का उद्देश्य ऊर्जा संरक्षण, नवीकरणीय ऊर्जा और ग्रीन एनर्जी के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना और विद्यार्थियों एवं आम नागरिकों को व्यवहारिक प्रशिक्षण देना है।
इन उद्यानों में अब उतनी ही मात्रा में बिजली का उत्पादन होगा जितनी खपत होगी, जिससे ये उद्यान नेट जीरो की श्रेणी में आ जाएंगे। इस पहल से न केवल बिजली बिल में भारी बचत होगी बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी बड़ा योगदान मिलेगा। अनुमान के अनुसार, इन सोलर पावर प्लांट्स की स्थापना से प्रतिवर्ष लगभग 127 टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी।

इंद्रावती टाइगर रिजर्व में 21 गांवों का विस्थापन प्रारंभ
छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में स्थित इंद्रावती टाइगर रिजर्व के अंतर्गत आने वाले गांवों का विस्थापन प्रारंभ हो गया है। इस रिजर्व में कुल 76 गांव आते हैं, जिनमें से पहले चरण में 21 गांवों को विस्थापन के लिए चयनित किया गया है। जो परिवार अपनी इच्छा से विस्थापित होना चाहते हैं, उन्हें 15 लाख रुपये नकद एवं बसने के लिए जमीन दी जाएगी। अब तक केवल एक गांव के ग्रामीणों ने सहमति दी है, जबकि कई लोग नक्सलवाद से प्रभावित होकर पहले ही गांव छोड़ चुके हैं। ग्रामीणों के विस्थापन के बाद यह रिजर्व, जो पिछले 40 वर्षों से पर्यटकों के लिए बंद था, पुनः पर्यटन हेतु खोला जाएगा।

परंपरा और आस्था का अनोखा संगम : बस्तर का मांझी कोर्ट जातर्रा
आस्था और परंपरा का अनोखा संगम मांझी कोर्ट जातर्रा बस्तर के केराकाल में आयोजित हुआ। इस आयोजन में देवी-देवता अपने पुजारियों, मांझियों, मुखियाओं और भक्तों के साथ एक स्थान पर एकत्र होते हैं। यहां पारिवारिक झगड़े, जमीन-जायदाद के विवाद और गांवों के आपसी मतभेद देवी-देवताओं की अदालत में प्रस्तुत किए जाते हैं। देवी-देवता अपने पुजारियों और मुखियाओं के माध्यम से फैसले सुनाते हैं। ग्रामीण इन निर्णयों को अंतिम और निष्पक्ष मानकर स्वीकार करते हैं। यह परंपरा बस्तर के आदिवासी समाज में आस्था और सामाजिक न्याय की गहरी झलक प्रस्तुत करती है।
विशेष परंपरा
मां बेमांगाई की उपासना के दौरान अब बिलासपुर की कला बेड़ भी चढ़ाई जाती है।
मांझी कोर्ट में मामीली देवी के पुत्र सोमेश्वर देव का स्वरूप कक्ष अंतिम अनुष्ठान के रूप में संपन्न होता है।
खान देव : सौहार्द और उपचार के प्रतीक
बस्तर अंचल में खान देव की पूजा विशेष रूप से की जाती है। लोकमान्यता है कि वे चिकित्सक थे और बीमारियों का उपचार करते थे।
मांझी परंपरा को उनकी स्मृति में ही प्रतिष्ठित किया गया।
खान देव का मंदिर भी विद्यमान है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु आकर पूजा-अर्चना करते हैं।
मांझी कोर्ट जातर्रा
यह पारंपरिक आयोजन बस्तर के केराकाल क्षेत्र में आयोजित होता है।
यहां देवी-देवताओं को एक ही मंच पर विराजित कर आपसी विवादों का निपटारा किया जाता है।
यह आयोजन स्थानीय समाज की आस्था, परंपरा और न्यायिक व्यवस्था की अनोखी झलक प्रस्तुत करता है।

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