Operation Sindoor
Operation Sindoor: ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा मई 2025 में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) और पाकिस्तान के भीतर स्थित आतंकवादी ठिकानों पर की गई एक साहसी सैन्य कार्रवाई है। यह भारत की ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ आतंकवाद नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा में निर्णायक नीति का प्रतीक है। इस सैन्य कार्रवाई का उद्देश्य केवल प्रतिशोध नहीं बल्कि क्षेत्रीय शांति की पुनर्स्थापना भी था।
1. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:
- स्थान: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले में 26 निर्दोष भारतीय नागरिक मारे गए।
- प्रायोजक: जांच एजेंसियों ने पुष्टि की कि इस हमले को पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा ने अंजाम दिया।
- राजनीतिक प्रतिक्रिया: भारत सरकार ने इस आतंकी कृत्य को ‘सीधी युद्ध घोषणा’ मानते हुए प्रतिशोध की रणनीति अपनाई।
2. ऑपरेशन सिंदूर का निष्पादन:
रणनीतिक लक्ष्य:
- आतंकवादियों के प्रशिक्षण शिविरों और मुख्यालयों को नष्ट करना।
- आतंकवाद को राज्य समर्थन देने वाले पाकिस्तान को कड़ा संदेश देना।
लक्षित क्षेत्र:
- बहावलपुर (Jaish-e-Mohammad HQ)
- मुरीदके (Lashkar-e-Taiba HQ)
- PoK के तीन जिले: बाग, कोटली और मुजफ्फराबाद
प्रयुक्त सैन्य शक्ति:
- राफेल फाइटर जेट: SCALP क्रूज़ मिसाइल से सुसज्जित
- AASM Hammer बम: लक्ष्य को उच्च सटीकता से नष्ट करने में सक्षम
- SkyStriker ड्रोन: आत्मघाती हमलों हेतु प्रयुक्त
अवधि:
- ऑपरेशन कुल 23 मिनट में संपन्न हुआ।
- मिशन में किसी भारतीय सैनिक के हताहत होने की सूचना नहीं।
3. सामरिक और राजनयिक महत्व:
भारत के दृष्टिकोण से:
- आतंकी ठिकानों को लक्ष्य बनाकर भारत ने अपनी आक्रामक रणनीति और आत्मरक्षा का अधिकार प्रदर्शित किया।
- इस ऑपरेशन ने Balakot (2019) और Surgical Strike (2016) की परंपरा को आगे बढ़ाया।
वैश्विक प्रतिक्रिया:
- संयुक्त राष्ट्र ने संयम की अपील की।
- अमेरिका और फ्रांस ने भारत के आत्मरक्षा अधिकार को मान्यता दी।
- चीन और पाकिस्तान ने आलोचना की परंतु भारत की कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में रही।
4. भारत की सुरक्षा नीति में बदलाव:
- डॉक्ट्रिन ऑफ प्रीएम्प्शन (Doctrine of Pre-emption) को स्वीकार करते हुए भारत ने स्पष्ट किया कि हमले से पहले कार्रवाई अब एक वैध रणनीति है।
- राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (NSC) की त्वरित बैठक और NSA अजित डोभाल के निर्देशन में निर्णय।
5. ऑपरेशन का प्रभाव:
सकारात्मक:
- आतंकवादी नेटवर्क को भारी क्षति
- जनता में विश्वास और सुरक्षा भावना में वृद्धि
- भारतीय सैन्य क्षमताओं का वैश्विक प्रदर्शन
चिंताएं:
- पाकिस्तान की ओर से जवाबी कार्रवाई की आशंका
- क्षेत्रीय स्थिरता पर संभावित प्रभाव
6. UPSC परीक्षा हेतु महत्त्वपूर्ण बिंदु:
- भारत की आतंकवाद विरोधी नीति का विकास
- भारत-पाकिस्तान संबंधों में उतार-चढ़ाव
- अंतरराष्ट्रीय कानून में आत्मरक्षा की अवधारणा
- संयुक्त राष्ट्र के तहत सैन्य कार्रवाई के अधिकार
7. संभावित मुख्य परीक्षा प्रश्न:
- ऑपरेशन सिंदूर भारत की आतंकवाद के प्रति नीति में किस प्रकार परिवर्तन को दर्शाता है? विश्लेषण कीजिए।
- ऑपरेशन सिंदूर के पश्चात भारत-पाकिस्तान संबंधों की स्थिति का मूल्यांकन कीजिए।
- पूर्व-सक्रिय सैन्य रणनीति (Pre-emptive Strike) की वैधता और इसके नीतिगत परिणामों पर चर्चा करें।
8. वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs):
प्रश्न 1:
ऑपरेशन सिंदूर किस घटना के प्रतिशोध में किया गया था? A. पुलवामा हमला 2019
B. उरी हमला 2016
C. पहलगाम हमला 2025
D. कंधार अपहरण 1999
उत्तर: C
प्रश्न 2:
ऑपरेशन सिंदूर में किस प्रकार की मिसाइल का उपयोग किया गया? A. ब्रह्मोस
B. पृथ्वी-2
C. SCALP
D. अग्नि-V
उत्तर: C
प्रश्न 3:
निम्नलिखित में से कौन-सा क्षेत्र ऑपरेशन सिंदूर का लक्ष्य नहीं था? A. बाग
B. कोटली
C. लाहौर
D. बहावलपुर
उत्तर: C
प्रश्न 4:
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने कौन-सा विमान मुख्य रूप से उपयोग किया? A. सुखोई-30 MKI
B. मिराज 2000
C. तेजस
D. राफेल
उत्तर: D
निष्कर्ष:
ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सैन्य रणनीति और कूटनीति का एक ऐतिहासिक उदाहरण है। यह केवल सैन्य कार्रवाई नहीं बल्कि भारत के आत्मरक्षा अधिकार, संप्रभुता की रक्षा और वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने का एक साहसिक कदम था। UPSC जैसे परीक्षाओं में इस प्रकार के समसामयिक घटनाक्रमों की गहरी समझ आवश्यक है।
