CG ASHA Yojana 2026
छत्तीसगढ़ राज्य की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से इसके गांवों, किसानों और ग्रामीण आजीविका पर निर्भर करती है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने और युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित करने की दिशा में विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली छत्तीसगढ़ सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। पूर्ववर्ती सरकार द्वारा संचालित ‘महात्मा गांधी ग्रामीण औद्योगिक पार्क’ (रीपा – RIPA) योजना को अब पूरी तरह से नए, पारदर्शी और अधिक प्रभावी स्वरूप में बदलने का निर्णय लिया गया है[cite: 4]!
23 जून, 2026 को मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में हुई अहम कैबिनेट बैठक में ‘अटल आजीविका समृद्धि हाट (आशा) योजना’ को शुरू करने की आधिकारिक मंजूरी दे दी गई है। यह योजना केवल पुरानी योजना का नाम बदलना नहीं है, बल्कि ग्रामीण विकास, स्वरोजगार और स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग का एक पूरा नया विज़न है। इस विस्तृत लेख में हम समझेंगे कि आशा योजना क्या है, पुरानी रीपा योजना क्यों विफल रही, और नई योजना से ग्रामीण महिलाओं तथा युवाओं का भविष्य कैसे बदलेगा।
1. ‘अटल आजीविका समृद्धि हाट (आशा)’ योजना क्या है?
अटल आजीविका समृद्धि हाट योजना (ASHA) छत्तीसगढ़ सरकार की एक महत्वाकांक्षी ग्रामीण स्वरोजगार पहल है। इसका मुख्य उद्देश्य गांवों को केवल उपभोग का केंद्र न रखकर, उन्हें ‘उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन’ का मजबूत हब (Hub) बनाना है।
इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे आधुनिक हाट (बाजार और कार्यस्थल) विकसित किए जाएंगे, जहां स्थानीय कच्चे माल से उत्पाद बनाए जा सकें और उन्हें वहीं से राष्ट्रीय बाज़ारों तक भेजा जा सके। इससे ग्रामीणों को अपने क्षेत्र में ही रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर मिलेंगे तथा स्थानीय उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध होगा।
योजना के प्रमुख तथ्य (Key Highlights):
- कैबिनेट मंजूरी की तिथि: 23 जून, 2026
- नोडल एजेंसी: छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान – NRLM)
- नोडल विभाग: पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग
- लक्षित वर्ग: ग्रामीण युवा, महिला स्व-सहायता समूह (SHGs) और स्थानीय उद्यमी[cite: 4]।
- वित्तीय भागीदारी: योजना के क्रियान्वयन में केंद्र और राज्य सरकार के व्यय का अनुपात 60:40 निर्धारित किया गया है।
2. पुरानी ‘रीपा’ (RIPA) योजना का क्या हुआ और यह क्यों बंद हुई?
अटल आजीविका समृद्धि हाट योजना के महत्व को समझने के लिए, हमें यह जानना होगा कि पूर्ववर्ती सरकार की ‘रीपा’ योजना के साथ क्या समस्या थी।
रीपा योजना का इतिहास:
पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने 2 अक्टूबर 2022 (गांधी जयंती) को महात्मा गांधी ग्रामीण औद्योगिक पार्क (रीपा) योजना की शुरुआत की थी[cite: 4]। इसका लक्ष्य प्रदेश के 146 ब्लॉकों में 300 रीपा केंद्र स्थापित करना था[cite: 4]। प्रत्येक केंद्र पर भवन निर्माण, मशीनरी, वर्किंग कैपिटल और मार्केटिंग के लिए लगभग 2 करोड़ रुपए खर्च करने का प्रावधान था।
विफलता के मुख्य कारण:
- फंड का दुरुपयोग और बर्बादी: रीपा योजना के लिए कुल 441 करोड़ रुपए का बजट स्वीकृत किया गया था, जिसमें से करीब 260 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके थे[cite: 4]। इसके बावजूद, अधिकांश केंद्र पिछले ढाई साल से बंद पड़े हैं[cite: 4]।
- मशीनों में जंग और वीरान भवन: तिल्दा ब्लॉक के माढ़ गांव सहित राज्य के अनेक रीपा केंद्रों की ग्राउंड रिपोर्ट बताती है कि भवन खुले होने के बावजूद उत्पादन पूरी तरह ठप है। परिसर प्लास्टिक के कबाड़ में तब्दील हो गए हैं और करोड़ों रुपयों की मशीनें जंग खा रही हैं[cite: 4]।
- भ्रष्टाचार के आरोप: नई सरकार बनने के बाद रीपा योजना में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की शिकायतों पर संभागवार छह-छह सदस्यीय जांच कमेटियां गठित की गई थीं[cite: 4]। इन कमेटियों ने मशीनों की खरीदी और विजन दस्तावेज में गड़बड़ियों की रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी है[cite: 4]।
यही कारण है कि नई सरकार ने इस योजना का नाम बदलकर ‘अटल आजीविका समृद्धि हाट (आशा)’ करने और पुराने इंफ्रास्ट्रक्चर को नई जवाबदेही के साथ उपयोग में लाने का निर्णय लिया है!
3. आशा योजना की नई रूपरेखा: 5 प्रमुख केंद्रों की स्थापना
प्रतियोगी परीक्षाओं (CGPSC/Vyapam) की तैयारी कर रहे छात्रों और आम नागरिकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि ‘आशा’ योजना के तहत केवल ग्रामीण क्षेत्रों में केंद्र स्थापित किए जाएंगे (शहरी क्षेत्रों में नहीं)। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को 360-डिग्री सपोर्ट देने के लिए नई योजना के तहत 5 तरह के विशेष केंद्र बनाए जाएंगे:
- सृजन केंद्र (Manufacturing & Creation Centers): इन केंद्रों में स्थानीय संसाधनों का उपयोग करके नए उत्पादों का निर्माण किया जाएगा। इसमें हथकरघा, बुनाई, सिलाई, बांस शिल्प (Bamboo craft), और टेराकोटा जैसी स्थानीय कलाओं को बढ़ावा दिया जाएगा। महिला स्व-सहायता समूहों को यहां काम करने के लिए शेड और मशीनें मिलेंगी।
- प्रसंस्करण केंद्र (Processing Centers): ग्रामीण क्षेत्रों में उत्पन्न होने वाले कृषि उत्पादों (जैसे- कोदो-कुटकी, रागी, दालें, वनोपज) की यहीं प्रोसेसिंग की जाएगी। इससे किसानों को कच्चे माल की जगह प्रसंस्कृत (Processed) माल बेचने का मौका मिलेगा, जिसकी बाजार में कीमत ज्यादा होती है। राइस मिलिंग और मिनी दाल मिल भी इसी का हिस्सा होंगे।
- सेवा केंद्र (Service Centers): गांवों में कृषि और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए सर्विस सेंटर स्थापित होंगे। इसमें ट्रैक्टर व कृषि उपकरणों की मरम्मत, कोल्ड स्टोरेज सुविधा, सोलर ड्रायर, और ग्रामीण डिजिटल सेवाएं (जैसे अटल चॉइस सेंटर) शामिल होंगी।
- विपणन केंद्र (Marketing Centers): ग्रामीण उत्पादों की सबसे बड़ी समस्या बाजार का न मिलना है। विपणन केंद्रों (Marketing Hubs) के माध्यम से स्थानीय स्तर पर बने उत्पादों की सही पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बिक्री की व्यवस्था की जाएगी। इन्हें सी-मार्ट (C-Mart) और ऑनलाइन ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स से जोड़ा जाएगा।
- आपूर्ति केंद्र (Supply Centers): इन केंद्रों का मुख्य कार्य उत्पादन इकाइयों तक कच्चे माल (Raw Material) की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना होगा, ताकि महिलाओं और कारीगरों का काम कभी न रुके।
4. बजट प्रावधान और नई गाइडलाइन
राज्य सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए धन की कोई कमी नहीं होने दे रही है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के राज्य बजट में ग्रामीण विकास व रोजगार केंद्रित योजनाओं (जैसे विकसित भारत G RAM G) सहित समग्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए 4,000 करोड़ रुपये का विशाल प्रावधान किया गया है!
वहीं, विशेष रूप से ‘आशा’ योजना को धरातल पर उतारने के लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) ने लगभग 100 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का शुरुआती प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा है[cite: 4]!
नई गाइडलाइन के 3 प्रमुख आधार:
राज्य स्वच्छ भारत मिशन (एसबीएम) व आजीविका मिशन के अधिकारियों के अनुसार, नई गाइडलाइन निम्नलिखित बिंदुओं पर केंद्रित होगी[cite: 4]:
- स्थिति का आकलन: प्रदेशभर के सभी 300 पुराने रीपा केंद्रों की विस्तृत विश्लेषण रिपोर्ट मंगाई गई है। इसमें भवनों और मशीनों की वर्तमान स्थिति, क्षति तथा मरम्मत की आवश्यकता का बारीकी से आकलन किया जा रहा है[cite: 4]।
- देनदारी का निपटारा: जिन जिलों में पुरानी योजना के तहत मशीनरी या निर्माण की कोई देनदारी बाकी है, उसका हिसाब कर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी[cite: 4]।
- नए केंद्रों का विस्तार: पुराने केंद्रों को व्यवस्थित कर उपयोग में लाने के साथ-साथ, जिलों की आवश्यकता के अनुसार नए ‘आशा’ केंद्र भी खोले जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक युवाओं को जोड़ा जा सके[cite: 4]।
5. आशा योजना से ग्रामीण महिलाओं और युवाओं को लाभ
अटल आजीविका समृद्धि हाट योजना का सीधा असर छत्तीसगढ़ के ग्रामीण जनजीवन पर पड़ेगा:
- पलायन पर रोक: गांवों में ही सृजन और प्रसंस्करण केंद्र खुलने से युवाओं को रोजगार के लिए शहरों या अन्य राज्यों (जैसे महाराष्ट्र, गुजरात) की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा।
- स्व-सहायता समूहों की आय में वृद्धि: महिलाएं जो पहले केवल पापड़, अचार या छोटे उत्पाद बनाती थीं, अब आधुनिक मशीनों की मदद से बड़े पैमाने पर गुणवत्तापूर्ण उत्पादन कर सकेंगी। यह उन्हें ‘लखपति दीदी’ बनाने के लक्ष्य में भी मदद करेगा।
- स्थानीय संसाधनों का उपयोग: बस्तर और सरगुजा जैसे क्षेत्रों में प्रचुर मात्रा में मिलने वाले वनोपज (Forest Produce) जैसे इमली, महुआ, और चिरौंजी की प्रोसेसिंग अब स्थानीय स्तर पर होगी।
6. निष्कर्ष (Conclusion)
23 जून 2026 के कैबिनेट फैसले के बाद, अटल आजीविका समृद्धि हाट (आशा) योजना छत्तीसगढ़ के ग्रामीण विकास के लिए एक ‘गेम चेंजर’ साबित होने वाली है। पुरानी रीपा योजना में हुई गलतियों से सबक लेते हुए, नई सरकार ने मॉनिटरिंग, मार्केटिंग और मशीनरी के सही उपयोग पर फोकस किया है। 100 करोड़ के आरंभिक बजट प्रस्ताव[cite: 4] और 60:40 के केंद्र-राज्य अनुपात के साथ, यह योजना निश्चित रूप से छत्तीसगढ़ के गांवों को आत्मनिर्भर बनाएगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. अटल आजीविका समृद्धि हाट (आशा) योजना क्या है?
यह छत्तीसगढ़ सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है जिसे 23 जून 2026 को कैबिनेट से मंजूरी मिली। इसका उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना और स्थानीय युवाओं व महिलाओं के लिए सृजन, प्रसंस्करण और विपणन केंद्र स्थापित कर रोजगार के अवसर पैदा करना है।
2. ‘रीपा’ (RIPA) योजना का नया नाम क्या रखा गया है?
पूर्ववर्ती सरकार की महात्मा गांधी ग्रामीण औद्योगिक पार्क (रीपा) योजना का नाम और स्वरूप बदलकर अब अटल आजीविका समृद्धि हाट (आशा) योजना कर दिया गया है[cite: 4]!
3. आशा योजना के तहत कौन-से 5 केंद्र स्थापित किए जाएंगे?
इस योजना के तहत केवल ग्रामीण क्षेत्रों में 5 प्रकार के केंद्र स्थापित किए जाएंगे: 1. सृजन केंद्र, 2. प्रसंस्करण केंद्र, 3. सेवा केंद्र, 4. विपणन केंद्र, और 5. आपूर्ति केंद्र!
4. क्या यह योजना शहरी क्षेत्रों में भी लागू होगी?
जी नहीं। अटल आजीविका समृद्धि हाट योजना के तहत केवल ग्रामीण क्षेत्रों (Villages) में ही केंद्र स्थापित किए जाएंगे!
5. आशा योजना के क्रियान्वयन के लिए नोडल एजेंसी कौन है?
इस योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए ‘छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन’ (NRLM) को नोडल एजेंसी तथा ‘पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग’ को नोडल विभाग बनाया गया है!
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