पैरी नदी (Pairi Nadi): उद्गम, इतिहास, सिकासार परियोजना व राजिम संगम (CGPSC Notes)


Pairi Nadi Origin

पैरी नदी (Pairi River) छत्तीसगढ़ राज्य की एक प्रमुख और पवित्र नदी है। यह महानदी अपवाह तंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। अपने ऐतिहासिक, धार्मिक और भौगोलिक महत्व के कारण CGPSC और CG Vyapam जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में पैरी नदी से जुड़े कई प्रश्न (जैसे— सिकासार परियोजना, राजिम त्रिवेणी संगम और उद्गम स्थल) बार-बार पूछे जाते हैं।

इस आर्टिकल में हम पैरी नदी का इतिहास, इसके प्राचीन बंदरगाह (Bandargah) होने के प्रमाण, इसके उद्गम स्थल और प्रमुख सहायक नदियों के बारे में विस्तार से जानेंगे।

पैरी नदी – एक नज़र में (Quick Facts)

परीक्षाओं के दृष्टिकोण से पैरी नदी के मुख्य तथ्य इस प्रकार हैं:

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विवरणमहत्वपूर्ण जानकारी
उद्गम स्थल (Origin)भातृगढ़ की पहाड़ी (बिन्द्रानवागढ़ तहसील), गरियाबंद
कुल लंबाई (Length)लगभग 90 किलोमीटर
मुहाना (Confluence)महानदी में (राजिम के समीप)
प्रमुख सहायक नदीसोंढूर नदी (Sondur River)
प्रमुख परियोजनासिकासार डैम (गरियाबंद)
त्रिवेणी संगमराजिम (महानदी, पैरी और सोंढूर का संगम)

पैरी नदी का उद्गम और बहाव क्षेत्र

  • उद्गम (Origin): पैरी नदी का उद्गम छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले की बिन्द्रानवागढ़ तहसील में स्थित भातृगढ़ की पहाड़ियों (Bhatrugarh Hills) से होता है। (यह लगभग 494 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है)।
  • बहाव क्षेत्र: यह नदी गरियाबंद और धमतरी जिलों के सीमावर्ती क्षेत्रों से होते हुए उत्तर-पश्चिम दिशा में बहती है।
  • राजिम त्रिवेणी संगम: गरियाबंद जिले से बहते हुए यह नदी राजिम (Rajim) पहुँचती है। यहाँ महानदी, पैरी और सोंढूर—इन तीन नदियों का पवित्र त्रिवेणी संगम होता है। इसी संगम तट पर प्रसिद्ध राजीव लोचन मंदिर और कुलेश्वर महादेव का मंदिर स्थित है।

पैरी नदी का इतिहास और प्राचीन बंदरगाह (River Port)

पैरी नदी का केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि एक समृद्ध व्यापारिक इतिहास भी रहा है। प्राचीन काल में राजिम और उसके आसपास का क्षेत्र एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र था।

  • नदी बंदरगाह (Bandargah): ऐतिहासिक और पुरातात्विक साक्ष्यों से पता चलता है कि प्राचीन काल (कलचुरी और नल वंश के समय) में महानदी और पैरी नदी के संगम (राजिम) का उपयोग एक अंतर्देशीय बंदरगाह (Inland River Port) के रूप में किया जाता था।
  • व्यापारिक मार्ग: उस समय पैरी नदी में पर्याप्त जलस्तर रहता था, जिससे बड़ी नावों के जरिए वनोपज, मसाले और खनिजों का व्यापार उड़ीसा और पूर्वी तटों तक किया जाता था।

प्रमुख सहायक नदी: सोंढूर (Sondur River)

पैरी नदी की सबसे प्रमुख सहायक नदी सोंढूर (Sondur) है। सोंढूर नदी का उद्गम ओडिशा के नवरंगपुर जिले (कोरापुट क्षेत्र) से होता है। यह नदी गरियाबंद के पास मालगांव में पैरी नदी में आकर मिल जाती है। सोंढूर नदी पर धमतरी जिले में सोंढूर जलाशय (Sondur Dam) का निर्माण किया गया है, जो इस क्षेत्र की सिंचाई का एक बड़ा माध्यम है।

सिकासार जलविद्युत परियोजना (Sikasar Dam Project)

पैरी नदी पर गरियाबंद जिले में सिकासार परियोजना (Sikasar Project) स्थित है। CGPSC परीक्षाओं में इससे जुड़े प्रश्न अक्सर आते हैं:

  • स्थापना: सिकासार बांध का निर्माण वर्ष 1995 में किया गया था।
  • जलविद्युत उत्पादन: यहाँ वर्ष 2006 से जलविद्युत (Hydropower) का उत्पादन शुरू हुआ।
  • क्षमता: यहाँ 3.5 MW की दो इकाइयां (2 x 3.5 = 7 मेगावॉट) स्थापित हैं। यह परियोजना गरियाबंद जिले में सिंचाई और बिजली आपूर्ति के लिए एक जीवन रेखा है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. पैरी नदी का उद्गम कहाँ से होता है?

पैरी नदी का उद्गम छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में स्थित भातृगढ़ की पहाड़ियों (बिन्द्रानवागढ़) से होता है।

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2. राजिम में किन तीन नदियों का संगम होता है?

राजिम को छत्तीसगढ़ का प्रयाग कहा जाता है। यहाँ महानदी, पैरी और सोंढूर नदी का त्रिवेणी संगम होता है।

3. पैरी नदी की प्रमुख सहायक नदी कौन सी है?

पैरी नदी की सबसे प्रमुख सहायक नदी सोंढूर नदी है, जो मालगांव (गरियाबंद) के पास इसमें मिल जाती है।

4. सिकासार परियोजना किस नदी पर स्थित है?

सिकासार परियोजना (डैम और जलविद्युत संयंत्र) पैरी नदी पर गरियाबंद जिले में स्थित है, जहाँ से 7 मेगावॉट बिजली का उत्पादन किया जाता है।

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