छत्तीसगढ़ किसान वृक्ष मित्र योजना : Kishan Vriksha Mitra Yojana 2025
Kishan Vriksha Mitra Yojana 2025 Kishan Vriksha Mitra Yojana 2025: छत्तीसगढ़ राज्य में निजी भूमि पर वृक्षों की कटाई एवं बिक्री अब तक एक असंगठित क्षेत्र रहा है, जिसके कारण किसानों को अपने उत्पाद का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है । वर्तमान में बस्तर, बिलासपुर तथा सरगुजा आदि क्षेत्रों में कुछ किसान यूकेलिप्टस जैसे पेड़ लगा रहे हैं, जिनकी कटाई पर तेलंगाना व मध्यप्रदेश स्थित कागज़ मिलें उन्हें ख़रीदती हैं, किंतु बायबैक (वापस खरीद) की कोई औपचारिक व्यवस्था नहीं है । ऐसी परिस्थिति में किसानों को वृक्षारोपण से दीर्घकालिक आर्थिक लाभ सुनिश्चित करना कठिन हो जाता है। किसानों की आय बढ़ाने और राज्य में वन आवरण एवं लकड़ी आधारित अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने वर्ष 2023 में किसान वृक्ष मित्र योजना की शुरुआत की है। यह योजना राज्य के वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा संचालित एक नवाचारी पहल है, जिसका उद्देश्य निजी भूमियों पर वाणिज्यिक एवं आर्थिक रूप से लाभकारी वृक्ष प्रजातियों का संगठित रोपण कराना तथा उपज के लिए सुनिश्चित बाज़ार उपलब्ध कराना है। योजना के उद्देश्य किसान वृक्ष मित्र योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों और अन्य भूस्वामियों को अपनी निजी भूमि पर आर्थिक रूप से लाभकारी वृक्ष प्रजातियों का रोपण करने के लिए प्रोत्साहित करना है। इस योजना द्वारा उत्पादित लकड़ी की बायबैक हेतु भागीदार संस्थानों/कंपनियों के माध्यम से पूर्व-व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी, जिससे किसानों को अपने उत्पाद का निश्चित खरीदार मिले और उनकी आय में वृद्धि हो । साथ ही, यह योजना राज्य में काठ एवं प्लाइवुड जैसे लकड़ी आधारित उद्योगों को बढ़ावा देकर राज्य के राजस्व में वृद्धि करने का लक्ष्य रखती है । इसके अतिरिक्त, वृक्षारोपण गतिविधियों से ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार सृजन होगा और सहभागी निवेश (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) के माध्यम से वृक्षारोपण पर आने वाले शासकीय व्यय में कमी लाने में मदद मिलेगी । संक्षेप में, इस योजना के माध्यम से:• किसानों एवं अन्य निजी भूमि धारकों की भूमि पर व्यावसायिक पेड़ लगाकर उनकी आय में वृद्धि करना ।• भागीदार कंपनियों द्वारा उपज की खरीद (बायबैक) सुनिश्चित कर किसानों को विपणन का आश्वासन देना ।• राज्य में लकड़ी व फर्नीचर उद्योगों को कच्चा माल देकर उद्योगों को बढ़ावा देना ।• सरकार के कर आधार को बढ़ाकर राजस्व में वृद्धि करना ।• ग्रामीण क्षेत्रों में रोज़गार का सृजन करना तथा साझेदारी से वित्तीय बोझ बांटकर सरकारी व्यय में कमी लाना । प्रमुख विशेषताएँ किसान वृक्ष मित्र योजना की रुपरेखा को विभिन्न श्रेणियों के लाभार्थियों की जरूरतों के अनुसार छह मॉडलों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक मॉडल में लाभार्थियों को भूमि की उपलब्धता, क्षेत्रफल और भागीदारी के स्तर के आधार पर वित्तीय सहायता का प्रावधान है। मॉडल 1 के अंतर्गत छोटे किसानों (जिनके पास 5 एकड़ तक भूमि है) द्वारा अधिकतम 5,000 वृक्षों का रोपण करने पर राज्य सरकार की ओर से 100% वित्तीय अनुदान प्रदान किया जाता है (यानी पूरा खर्च सरकार उठाएगी)। मॉडल 2 के अंतर्गत वे किसान अथवा सरकारी/अर्ध-सरकारी/स्वायत्त संस्थान आते हैं जिनके पास 5 एकड़ या उससे अधिक भूमि है – ऐसे मामलों में प्रति एकड़ अधिकतम 1000 पौधों के रोपण पर सरकार द्वारा 50% वित्तीय सहायता तीन वर्षों तक उपलब्ध कराई जाती है, शेष 50% व्यय लाभार्थी द्वारा वहन किया जाएगा । मॉडल 3 में निजी शैक्षणिक संस्थान, निजी ट्रस्ट, गैर-सरकारी संगठन (NGOs), पंचायतें तथा लीज़ पर भूमि धारणकर्ता (लीज़धारी) शामिल हैं; ये यदि अपनी भूमि पर वृक्षारोपण करना चाहें तो तीन वर्षों के लिए 50% अनुदान वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा प्रदान किया जाएगा, तथा शेष खर्च उन्हें स्वयं उठाना होगा । इस मॉडल में भूमि के आकार या रोपित वृक्षों की संख्या की कोई अधिकतम सीमा निर्धारित नहीं है । मॉडल 4 उन किसानों या संस्थानों के लिए है जो अपने उपलब्ध 5 एकड़ भूमि (अधिकतम 5000 वृक्ष) पर वृक्षारोपण करना चाहते हैं और किसी सहायक संस्था/निजी कंपनी की भागीदारी से वित्तीय सहयोग प्राप्त कर सकते हैं। इस स्थिति में भी राज्य सरकार द्वारा 50% अनुदान तीन वर्षों हेतु दिया जाएगा , तथा शेष खर्च लाभार्थी या भागीदार संस्था मिलकर उठाएँगे। मॉडल 5 के तहत संभवतः ऐसा प्रावधान है जिसमें बड़े भूमि धारकों के समूह या किसी संगठन के माध्यम से वृक्षारोपण पर वित्तीय सहभागिता को प्रोत्साहित किया गया है (इस संबंध में उपलब्ध दस्तावेज़ में सीमित जानकारी है)। अंततः मॉडल 6 पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप का उन्नत स्वरूप है, जिसमें यदि कोई निजी शिक्षण संस्था, ट्रस्ट, NGO, पंचायत या लीज़धारी अपनी भूमि पर ऐसी प्रजातियों का वृक्षारोपण करना चाहते हैं जिनके उत्पाद की खरीद हेतु कोई बाहरी संस्था/निजी कंपनी अग्रिम इच्छुक है, तो वित्तीय भार 50:50 के अनुपात में सरकार व भागीदार के बीच बांटा जाता है। इस मॉडल में कुल व्यय का 25% अनुदान वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग देगा और 25% संबंधित भागीदार संस्था/कंपनी द्वारा दिया जाएगा, शेष 50% खर्च लाभार्थी को स्वयं वहन करना होगा। इसके अतिरिक्त भागीदार संस्था किसानों से उत्पाद की बायबैक (खरीद) सुनिश्चित करेगी, जिससे किसानों को बाज़ार की गारंटी मिले। यदि किसी संस्था द्वारा वन संरक्षण कानून के तहत अनिवार्य वृक्षारोपण कराया जा रहा है, तो उस परिस्थिति में किसान वृक्ष मित्र योजना का लाभ उन पौधारोपण कार्यों पर नहीं लिया जा सकेगा। योजना के सभी मॉडलों में वृक्षारोपण क्षेत्र में घेराबंदी (फ़ेंसिंग) और सिंचाई की व्यवस्था लाभार्थी द्वारा अपने स्तर पर करनी आवश्यक है । योजना के तहत प्रमुख वृक्ष प्रजातियाँ चिन्हित की गई हैं जिन्हें तेज़ी से बढ़ने वाली और आर्थिक लाभ देने वाली माना जाता है। इन प्रजातियों में क्लोनल यूकेलिप्टस (नीलगिरी), ऊतक-संवर्धित सागवान (टीक), ऊतक-संवर्धित बाँस, तथा मेलिया डूबिया (मालाबार नीम) प्रमुख हैं । इन पौधों को ऊतक संवर्धन (टिशू कल्चर) तकनीक के माध्यम से उगाया जाता है ताकि बेहतर वृद्धि दर व गुणात्मक लकड़ी प्राप्त हो सके। उपरोक्त मुख्य प्रजातियों के अतिरिक्त अन्य आर्थिक दृष्टि से लाभकारी प्रजातियाँ (जैसे कत्था, शीशम आदि) को भी सीमित पैमाने पर शामिल किया गया है। प्रति एकड़ लगभग 1000 पौधे रोपे जाने का मानक रखा गया है, जिससे भूमि का अधिकतम उपयोग हो सके । योजना की अवधि को वित्तीय वर्ष 2023-24 से 2029-30 तक निर्धारित किया गया है, अर्थात यह एक दीर्घावधि (लगभग 7 वर्ष) परियोजना है। पहले वर्ष (2023-24) में 36,000 एकड़ क्षेत्र में वृक्षारोपण करने का लक्ष्य रखा गया … Read more