05 सितंबर 2026 करेंट अफेयर्स : राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, छत्तीसगढ़ की महत्वपूर्ण घटनाएं Chhattisgarh Current Affairs 2026

5 सितंबर 2026 के महत्वपूर्ण करेंट अफेयर्स में छत्तीसगढ़ और भारत के प्रमुख विकास, जल संरक्षण, खनिज, सड़क और राष्ट्रीय घटनाक्रम

Chhattisgarh Current Affairs 2026 Chhattisgarh Current Affairs 2026 : 5 सितंबर 2026 के महत्वपूर्ण घटनाक्रमों में छत्तीसगढ़ की खनिज संपदा, न्यायपालिका से जुड़े नियुक्ति संबंधी घटनाक्रम, रूस-यूक्रेन युद्ध में भारत की कूटनीतिक भूमिका, भारत की रक्षा कूटनीति की नई रणनीतिक योजना, अंतरिक्ष क्षेत्र की प्रगति, खेल उपलब्धियां, जल संरक्षण, सड़क अवसंरचना, शिक्षा, सरकारी भर्ती तथा पर्यावरण संरक्षण जैसे विषय प्रमुख रहे। इन घटनाओं को एक साथ समझना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इनमें राज्य विकास, राष्ट्रीय सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय संबंध, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, शिक्षा और पर्यावरण—सभी प्रमुख क्षेत्रों के महत्वपूर्ण आयाम शामिल हैं। 3 सितंबर 2026 करेंट अफेयर्स : राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, छत्तीसगढ़ की महत्वपूर्ण घटनाएं Chhattisgarh Current Affairs 2026 1. छत्तीसगढ़ में खनिज क्षेत्र का विस्तार और क्रिटिकल मिनरल्स पर ध्यान 20 साल बाद खुली कोरंडम खदान छत्तीसगढ़ के खनिज क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण विकास के रूप में लंबे अंतराल के बाद कोरंडम खदान से संबंधित गतिविधियां चर्चा में हैं। राज्य में अब खनिज संसाधनों के साथ-साथ क्रिटिकल मिनरल्स पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। खनिज क्षेत्र में आगे की गतिविधियों के लिए मानसून के बाद सर्वे और ड्रिलिंग कार्य बढ़ने की बात सामने आई है। इससे राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्ध खनिज संभावनाओं की पहचान और विकास की दिशा में कार्य को गति मिलने की संभावना है। खनिज ब्लॉकों की नीलामी खनिज ब्लॉकों की नीलामी से 4 लाख 05 करोड़ रुपये से अधिक राजस्व मिलने की उम्मीद व्यक्त की गई है। खनन गतिविधियों और खनिज संसाधनों का महत्व केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है। यह राज्य के राजस्व और औद्योगिक गतिविधियों से भी जुड़ा हुआ है। छत्तीसगढ़ के प्रमुख खनिज उत्पादन की राष्ट्रीय हिस्सेदारी उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार राज्य की राष्ट्रीय उत्पादन में हिस्सेदारी इस प्रकार दर्ज की गई है— खनिज क्षेत्र से राजस्व में वृद्धि खनिज क्षेत्र से प्राप्त राजस्व के आंकड़े भी इस क्षेत्र के आर्थिक महत्व को दर्शाते हैं— वर्ष राजस्व 2021-22 12305.38 करोड़ रुपये 2022-23 12941.33 करोड़ रुपये 2023-24 12795.35 करोड़ रुपये 2024-25 14592.38 करोड़ रुपये 2025-26 16700.00 करोड़ रुपये परीक्षा के लिए याद रखें कोरंडम खदान + क्रिटिकल मिनरल्स + खनिज ब्लॉक नीलामी + बढ़ता राजस्व—छत्तीसगढ़ के खनिज क्षेत्र से जुड़े प्रमुख बिंदु हैं। 2. न्यायपालिका से जुड़ा महत्वपूर्ण घटनाक्रम छत्तीसगढ़ की न्यायिक व्यवस्था से संबंधित एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में महाधिवक्ता और मुख्य न्यायाधीश पदों से जुड़े बदलाव चर्चा में रहे। इस घटनाक्रम में जस्टिस संजय के. अग्रवाल का नाम प्रमुख रूप से सामने आया है और उन्हें राजस्थान में मुख्य न्यायाधीश बनाए जाने से संबंधित जानकारी भी प्रमुख रही। न्यायपालिका में उच्च पदों पर नियुक्तियां प्रशासनिक और संवैधानिक व्यवस्था की दृष्टि से महत्वपूर्ण होती हैं। इसलिए ऐसे घटनाक्रम प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विशेष महत्व रखते हैं। परीक्षा के लिए याद रखें 3. रूस-यूक्रेन युद्ध समाप्त कराने के प्रयासों में भारत की कूटनीतिक पहल यूक्रेन पहुंचे एस. जयशंकर रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने और शांति स्थापित करने के प्रयासों के बीच भारत की कूटनीतिक भूमिका महत्वपूर्ण रही। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कीव पहुंचकर यूक्रेन के विदेश मंत्री और राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से चर्चा की। बैठक में युद्ध समाप्त करने, शांति की दिशा में प्रयासों और संबंधित कूटनीतिक पहलुओं पर चर्चा हुई। भारत की प्रतिबद्धता यूक्रेन की ओर से युद्ध समाप्त करने के प्रयासों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को महत्वपूर्ण बताया गया। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि भारत युद्ध की स्थिति के बीच संवाद और समाधान की दिशा में अपनी कूटनीतिक भूमिका निभा रहा है। 4. भारत की रक्षा कूटनीति के लिए अगले दशक की समग्र योजना रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जारी किया ‘रक्षा’ दस्तावेज भारत की रक्षा कूटनीति के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ‘रक्षा’ नामक दस्तावेज जारी किया। यह दस्तावेज अगले दशक के लिए भारत की रक्षा कूटनीति का व्यापक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। दस्तावेज के प्रमुख स्तंभ इस रणनीतिक योजना में निम्न प्रमुख क्षेत्र शामिल किए गए हैं— रणनीतिक महत्व यह योजना भारत की रक्षा कूटनीति को व्यापक वैश्विक संदर्भ में मजबूत करने की दिशा में तैयार की गई है। रणनीतिक साझेदारी के माध्यम से सहयोग बढ़ाने, क्षमता निर्माण पर ध्यान देने, स्वदेशी रक्षा निर्यात को प्रोत्साहित करने और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने जैसे बिंदु इसमें प्रमुख हैं। 5. अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की रणनीतिक क्षमता आसमान में तैनात हुई भारत की रणनीतिक आंख भारत की अंतरिक्ष और रणनीतिक क्षमता से जुड़ा एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम भी सामने आया है। अंतरिक्ष में रणनीतिक उपयोग से संबंधित उपग्रह तैनाती को भारत की सुरक्षा और तकनीकी क्षमताओं के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना गया। अंतरिक्ष क्षेत्र में बढ़ती तकनीकी क्षमता रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस विकास ने अंतरिक्ष आधारित तकनीक के क्षेत्र में भारत की प्रगति को प्रमुखता दी है। मुख्य समझ इस घटनाक्रम को निम्न संदर्भों में याद रखा जा सकता है— 6. मलेशिया में रायगढ़ की बेटियों का शानदार प्रदर्शन भारत को दिलाया कांस्य पदक छत्तीसगढ़ के रायगढ़ से जुड़ी खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की। मलेशिया में आयोजित प्रतियोगिता में भारतीय महिला शतरंज टीम ने कांस्य पदक प्राप्त किया। रायगढ़ की खिलाड़ियों की भागीदारी और प्रदर्शन ने इस उपलब्धि को छत्तीसगढ़ के लिए भी विशेष बनाया। उपलब्धि का महत्व यह सफलता दर्शाती है कि राज्य की प्रतिभाएं अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए उल्लेखनीय प्रदर्शन कर रही हैं। परीक्षा के लिए याद रखें 7. शिक्षक दिवस और डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती भारत रत्न डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को नमन 5 सितंबर को भारत के पूर्व राष्ट्रपति, प्रख्यात शिक्षाविद और महान विचारक डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती के अवसर पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया गया। इस अवसर पर देशभर के शिक्षकों और गुरुओं को शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दी गईं। मुख्य तथ्य परीक्षा के लिए याद रखें 5 सितंबर → डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन → शिक्षक दिवस 8. साहित्यिक जगत से संबंधित स्मरण छत्तीसगढ़ की साहित्यिक और सांस्कृतिक पहचान के विकास में अनेक साहित्यकारों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। वर्तमान घटनाक्रम में पंडित प्यारेलाल से संबंधित साहित्यिक योगदान को विशेष रूप से प्रस्तुत किया गया है। पंडित प्यारेलाल और छत्तीसगढ़ी साहित्य पंडित प्यारेलाल को छत्तीसगढ़ी साहित्य के प्रमुख रचनाकारों में शामिल किया गया है। उनकी साहित्यिक रचनाओं ने छत्तीसगढ़ी भाषा … Read more

छत्तीसगढ़ किसान वृक्ष मित्र योजना : Kishan Vriksha Mitra Yojana 2025

Kishan Vriksha Mitra Yojana 2025 Kishan Vriksha Mitra Yojana 2025: छत्तीसगढ़ राज्य में निजी भूमि पर वृक्षों की कटाई एवं बिक्री अब तक एक असंगठित क्षेत्र रहा है, जिसके कारण किसानों को अपने उत्पाद का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है । वर्तमान में बस्तर, बिलासपुर तथा सरगुजा आदि क्षेत्रों में कुछ किसान यूकेलिप्टस जैसे पेड़ लगा रहे हैं, जिनकी कटाई पर तेलंगाना व मध्यप्रदेश स्थित कागज़ मिलें उन्हें ख़रीदती हैं, किंतु बायबैक (वापस खरीद) की कोई औपचारिक व्यवस्था नहीं है । ऐसी परिस्थिति में किसानों को वृक्षारोपण से दीर्घकालिक आर्थिक लाभ सुनिश्चित करना कठिन हो जाता है। किसानों की आय बढ़ाने और राज्य में वन आवरण एवं लकड़ी आधारित अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने वर्ष 2023 में किसान वृक्ष मित्र योजना की शुरुआत की है। यह योजना राज्य के वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा संचालित एक नवाचारी पहल है, जिसका उद्देश्य निजी भूमियों पर वाणिज्यिक एवं आर्थिक रूप से लाभकारी वृक्ष प्रजातियों का संगठित रोपण कराना तथा उपज के लिए सुनिश्चित बाज़ार उपलब्ध कराना है। योजना के उद्देश्य किसान वृक्ष मित्र योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों और अन्य भूस्वामियों को अपनी निजी भूमि पर आर्थिक रूप से लाभकारी वृक्ष प्रजातियों का रोपण करने के लिए प्रोत्साहित करना है। इस योजना द्वारा उत्पादित लकड़ी की बायबैक हेतु भागीदार संस्थानों/कंपनियों के माध्यम से पूर्व-व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी, जिससे किसानों को अपने उत्पाद का निश्चित खरीदार मिले और उनकी आय में वृद्धि हो । साथ ही, यह योजना राज्य में काठ एवं प्लाइवुड जैसे लकड़ी आधारित उद्योगों को बढ़ावा देकर राज्य के राजस्व में वृद्धि करने का लक्ष्य रखती है । इसके अतिरिक्त, वृक्षारोपण गतिविधियों से ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार सृजन होगा और सहभागी निवेश (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) के माध्यम से वृक्षारोपण पर आने वाले शासकीय व्यय में कमी लाने में मदद मिलेगी । संक्षेप में, इस योजना के माध्यम से:• किसानों एवं अन्य निजी भूमि धारकों की भूमि पर व्यावसायिक पेड़ लगाकर उनकी आय में वृद्धि करना ।• भागीदार कंपनियों द्वारा उपज की खरीद (बायबैक) सुनिश्चित कर किसानों को विपणन का आश्वासन देना ।• राज्य में लकड़ी व फर्नीचर उद्योगों को कच्चा माल देकर उद्योगों को बढ़ावा देना ।• सरकार के कर आधार को बढ़ाकर राजस्व में वृद्धि करना ।• ग्रामीण क्षेत्रों में रोज़गार का सृजन करना तथा साझेदारी से वित्तीय बोझ बांटकर सरकारी व्यय में कमी लाना । प्रमुख विशेषताएँ किसान वृक्ष मित्र योजना की रुपरेखा को विभिन्न श्रेणियों के लाभार्थियों की जरूरतों के अनुसार छह मॉडलों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक मॉडल में लाभार्थियों को भूमि की उपलब्धता, क्षेत्रफल और भागीदारी के स्तर के आधार पर वित्तीय सहायता का प्रावधान है। मॉडल 1 के अंतर्गत छोटे किसानों (जिनके पास 5 एकड़ तक भूमि है) द्वारा अधिकतम 5,000 वृक्षों का रोपण करने पर राज्य सरकार की ओर से 100% वित्तीय अनुदान प्रदान किया जाता है (यानी पूरा खर्च सरकार उठाएगी)। मॉडल 2 के अंतर्गत वे किसान अथवा सरकारी/अर्ध-सरकारी/स्वायत्त संस्थान आते हैं जिनके पास 5 एकड़ या उससे अधिक भूमि है – ऐसे मामलों में प्रति एकड़ अधिकतम 1000 पौधों के रोपण पर सरकार द्वारा 50% वित्तीय सहायता तीन वर्षों तक उपलब्ध कराई जाती है, शेष 50% व्यय लाभार्थी द्वारा वहन किया जाएगा । मॉडल 3 में निजी शैक्षणिक संस्थान, निजी ट्रस्ट, गैर-सरकारी संगठन (NGOs), पंचायतें तथा लीज़ पर भूमि धारणकर्ता (लीज़धारी) शामिल हैं; ये यदि अपनी भूमि पर वृक्षारोपण करना चाहें तो तीन वर्षों के लिए 50% अनुदान वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा प्रदान किया जाएगा, तथा शेष खर्च उन्हें स्वयं उठाना होगा । इस मॉडल में भूमि के आकार या रोपित वृक्षों की संख्या की कोई अधिकतम सीमा निर्धारित नहीं है । मॉडल 4 उन किसानों या संस्थानों के लिए है जो अपने उपलब्ध 5 एकड़ भूमि (अधिकतम 5000 वृक्ष) पर वृक्षारोपण करना चाहते हैं और किसी सहायक संस्था/निजी कंपनी की भागीदारी से वित्तीय सहयोग प्राप्त कर सकते हैं। इस स्थिति में भी राज्य सरकार द्वारा 50% अनुदान तीन वर्षों हेतु दिया जाएगा , तथा शेष खर्च लाभार्थी या भागीदार संस्था मिलकर उठाएँगे। मॉडल 5 के तहत संभवतः ऐसा प्रावधान है जिसमें बड़े भूमि धारकों के समूह या किसी संगठन के माध्यम से वृक्षारोपण पर वित्तीय सहभागिता को प्रोत्साहित किया गया है (इस संबंध में उपलब्ध दस्तावेज़ में सीमित जानकारी है)। अंततः मॉडल 6 पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप का उन्नत स्वरूप है, जिसमें यदि कोई निजी शिक्षण संस्था, ट्रस्ट, NGO, पंचायत या लीज़धारी अपनी भूमि पर ऐसी प्रजातियों का वृक्षारोपण करना चाहते हैं जिनके उत्पाद की खरीद हेतु कोई बाहरी संस्था/निजी कंपनी अग्रिम इच्छुक है, तो वित्तीय भार 50:50 के अनुपात में सरकार व भागीदार के बीच बांटा जाता है। इस मॉडल में कुल व्यय का 25% अनुदान वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग देगा और 25% संबंधित भागीदार संस्था/कंपनी द्वारा दिया जाएगा, शेष 50% खर्च लाभार्थी को स्वयं वहन करना होगा। इसके अतिरिक्त भागीदार संस्था किसानों से उत्पाद की बायबैक (खरीद) सुनिश्चित करेगी, जिससे किसानों को बाज़ार की गारंटी मिले। यदि किसी संस्था द्वारा वन संरक्षण कानून के तहत अनिवार्य वृक्षारोपण कराया जा रहा है, तो उस परिस्थिति में किसान वृक्ष मित्र योजना का लाभ उन पौधारोपण कार्यों पर नहीं लिया जा सकेगा। योजना के सभी मॉडलों में वृक्षारोपण क्षेत्र में घेराबंदी (फ़ेंसिंग) और सिंचाई की व्यवस्था लाभार्थी द्वारा अपने स्तर पर करनी आवश्यक है । योजना के तहत प्रमुख वृक्ष प्रजातियाँ चिन्हित की गई हैं जिन्हें तेज़ी से बढ़ने वाली और आर्थिक लाभ देने वाली माना जाता है। इन प्रजातियों में क्लोनल यूकेलिप्टस (नीलगिरी), ऊतक-संवर्धित सागवान (टीक), ऊतक-संवर्धित बाँस, तथा मेलिया डूबिया (मालाबार नीम) प्रमुख हैं । इन पौधों को ऊतक संवर्धन (टिशू कल्चर) तकनीक के माध्यम से उगाया जाता है ताकि बेहतर वृद्धि दर व गुणात्मक लकड़ी प्राप्त हो सके। उपरोक्त मुख्य प्रजातियों के अतिरिक्त अन्य आर्थिक दृष्टि से लाभकारी प्रजातियाँ (जैसे कत्था, शीशम आदि) को भी सीमित पैमाने पर शामिल किया गया है। प्रति एकड़ लगभग 1000 पौधे रोपे जाने का मानक रखा गया है, जिससे भूमि का अधिकतम उपयोग हो सके । योजना की अवधि को वित्तीय वर्ष 2023-24 से 2029-30 तक निर्धारित किया गया है, अर्थात यह एक दीर्घावधि (लगभग 7 वर्ष) परियोजना है। पहले वर्ष (2023-24) में 36,000 एकड़ क्षेत्र में वृक्षारोपण करने का लक्ष्य रखा गया … Read more